Thursday, June 13, 2024
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जानिए काम करवाने के नाम पर करोड़ो की घूस और लड़की की डिमांड करने वाला कौन है ये शक्स जो करता है आईएएस का करीबी होने का दावा

नैनीताल जिले में एक बड़ा संगीन मामला सामने आ रहा है जहां रियल इस्टेट ब्रोकर के द्वारा नैनीताल डीएम का नाम लेकर काम करवाने की एवज़ में लाखों रुपए की धोखाधड़ी की जा रही है और काम करवाने के नाम पर पैसे के साथ लड़कियों की भी मांग की जा रही है ।

मामले के अनुसार कालाढुंगी तहसील के पास गेबुवा खास में कुलवंत कौर पुत्री सुरजीत सिंह ने सन 1970 में लगभग 74 बीघा जमीन खरीदी गयी थी जो कि सीलिंग से बाहर थी लेकिन कुलवंत कौर की जमीन को सरकारी दस्तावेजों में उनके पिता की संयुक्त भूमि में जोड़ दिया गया जिसके बाद वह जमीन सीलिंग से प्रभावित हो गयी । सीलिंग से प्रभावित होने के बाद कुलवंत कौर के पति सजेन्द्र सिंह और उनका परिवार इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा जहां कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कुलवंत कौर की आपत्ति दर्ज़ की और नैनीताल प्रशासन को सुनवाई करने और मामले को निस्तारित करने के लिए आदेश किए । लेकिन पैरवी नहीं हो पाने की वजह से वर्ष 1999 से मामला नैनीताल अपर डीएम कार्यालय में विचाराधीन हो गया । कुलवंत कौर की मृत्यु के बाद जमीन सरकारी दस्तावेजों में उनके बेटों जगदेव सिंह और जसप्रीत सिंह के नाम दर्ज़ हो चुकी थी । सीलिंग से जमीन हटाने का मामला अपर डीएम नैनीताल में 1999 से विचारधीन था पैरवी वकील आदि के खर्चे के लिए जगदेव सिंह और जसप्रीत सिंह को पैसों की जरूरत थी लिहाज़ा उन्होने गौरव सती से संपर्क किया , गौरव सती जो कि स्थानीय निवासी है और कॉर्बेट नेचरक्राफ्ट एलएलपी के नाम से रियल एस्टेट का कारोबार करते है । गौरव सती से जमीन का सौदा वर्ष 2021 में बतौर अग्रिम धनराशि लेकर किया गया जिसमें सजेन्द्र सिंह एवं उनके परिवार की सहमति गौरव सती से इस बात पर बनी कि जब भूमि पूरी तरह से सीलिंग से हट जाएगी तक जाकर पूरा पैसा दिया जाएगा और जमीन की रजिस्ट्री गौरव सती के नाम कर दी जाएगी और न्यायालय में भूमि को सीलिंग से हटवाने के लिए पैरवी सजेन्द्र सिंह एवं उनका परिवार करेगा लेकिन उस पर जो भी खर्चा आयेगा वो गौरव सती वहन करेंगे । जिसके बाद कुलवंत कौर के पति सजेन्द्र सिंह और परिवार के द्वारा एडीएम कार्यालय में विचाराधीन पड़े मामले के लिए वकील नियुक्त किया गया और अनुबंध के अनुसार वकील की फीस गौरव सती के द्वारा चुकाई गयी जिसके बाद मामला प्रकाश में आ गया ।

मामला प्रकाश में आते ही कुलदीप कत्याल नाम का एक रियल इस्टेट ब्रोकर ने गौरव सती के सहयोगी विकास वाधवा को संपर्क किया और तत्कालीन नैनीताल डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल से घनिष्ठ संबंध बताकर है मामले को जल्द से जल्द निपटाने का आश्वासन दिया । जिसके बाद 18 जनवारी 2022 को कुलदीप कत्याल कैलाश चन्द्र सती और विकास वाधवा को लेकर नैनीताल डीएम कार्यालय पहुंचा जहां और डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल से मुलाक़ात की गयी । डीएम का आश्वासन मिलने पर भूमि को सीलिंग से मुक्त कराने के लिए किसानों द्वारा प्रार्थना पत्र डीएम नैनीताल को दिया गया ।

वापस लौटने पर कुलदीप कत्याल के द्वारा विकास वाधवा को बताया गया कि डीएम नैनीताल से काम करवाने की एवज़ में, गौरव सती और उनके सहयोगियों को खर्चा करना पड़ेगा साथ ही काम करवाने की एवज में उक्त भूमि में से कुल 3300 वर्ग गज़ जमीन कुलदीप कत्याल को देनी होगी जिसकी काम होने के बाद रजिस्ट्री कुलदीप कत्याल के नाम करनी होगी होगी ।

बतौर विकास वाधवा मामला कई वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था लेकिन जमीन पर उनके और गौरव सती के द्वारा काफी निवेश किया जा चुका था जिस कारण विकास वाधवा और गौरव सती कुलदीप कत्याल के द्वारा बताई गयी शर्तों पर राजी हो गए और कुलदीप कत्याल को गौरव सती और विकास वाधवा की कंपनी कॉर्बेट नेचर क्राफ्ट एलएलपी के द्वारा 3300 वर्ग गज जमीन का अलोटमेंट कर दिया गया । विकास वाधवा के अनुसार वो कुलदीप कत्याल के साथ दिनांक 18 जनवरी 2023 को 10 लाख रुपए एक बैग में लेकर जनवरी 2023 में डीएम के कैंप कार्यालय हल्द्वानी पहुंचे और जहां कुलदीप कत्याल ने विकास वाधवा को डीएम कार्यालय के अंदर एक व्यक्ति से मिलाया और उसका परिचय एडीएम के रूप में करवाया ।
जिसके बाद कुलदीप कत्याल के द्वारा मामले को कुछ ही दिनों में निस्तारित करने के आश्वासन पर पैसे से भरा बैग तथाकथित एडीएम को दे दिया गया लेकिन कई माह बीतने के बाद भी मामले का निस्तारण नहीं हुआ जिसके बाद कुलदीप कत्याल के द्वारा डीएम नैनीताल का नाम लेकर 10 लाख रुपए की मांग और की गयी । चूंकि विकास वाधवा और गौरव सती का लाखों में निवेश हो चुका था उन्होने 10 लाख रुपए देकर मामला निस्तारित करना उचित समझा ।
जिसके बाद गौरव सती के कोर्डिनेटर तारा दत्त के द्वारा कुलदीप कत्याल को दो किश्तों में रकम देने पर सहमति बनी । और गौरव सती के द्वारा पैसो का इंतजाम कर उनके कार्यालय सहयोगी अजय रावत के द्वारा पाँच लाख की रकम कुलदीप कत्याल को उनके मुरादाबाद स्थित आवास पर पहुंचाई गयी जिसकी ऑनलाइन लोकेशन खुद कुलदीप कत्याल के द्वारा अजय रावत को दी ।
दूसरी किश्त के लिए कुलदीप कत्याल ने ऑनलाइन लोकेशन बैलपडाव चौराहे पर दी जहां पाँच लाख की दूसरी किश्त अजय रावत के द्वारा 13 मार्च 2023 को पहुंचाई गयी ।
20 लाख की रकम खर्च करने के बाद भी जब काम नहीं हुआ तो कोर्डिनेटर तारा दत्त ने कुलदीप कत्याल से कारण पूछा जिस पर कुलदीप कत्याल ने 1 करोड़ रुपए के साथ गौरव सती के कार्यालय में काम करने वाली लड़की की मांग की जिसके साथ वह शारीरिक संबंध बना सके और साथ ही यह भी कहा की वो लड़की के साथ लेकर नैनीताल काम करवाने जाएंगे । बतौर गौरव सती ने बताया कि 1 करोड़ की रकम हम नहीं जुटा सकते थे पहले से ही लाखों में पैसा जा चुका है इसलिए उन्होने तारा दत्त के माध्यम से दिये गए पैसों को लौटने के लिए बोला जिस पर कुलदीप कत्याल भड़क गया और उसने चेतावनी देते हुए कहा कि डीएम नैनीताल से वो उक्त जमीन को सरकारी जमीन में हस्तांतरित करा देंगे और फर्जीवाड़े के केस में फंसा देंगे ।

कुछ दिनों के बाद पटवारी और कानूनगो जमीन की जांच करने गेबुवा खास पहुंचे जिसके बाद गौरव सती ने तहसीलदार प्रियंका रानी से संपर्क किया और जांच के बारे में पूछा तो तहसीलदार ने गौरव सती को एक शिकायत पत्र दिखाया जिस पर डीएम नैनीताल ने जांच करने के आदेश किए थे ।
आगे गौरव सती ने बताया कि नैनीताल डीएम को कुलदीप कत्याल के द्वारा दिये गए शिकायती पत्र के अनुसार; कुलदीप कत्याल कॉर्बेट घूमने आए हुए थे जहां पर गौरव सती की कर्मचारी रचिता के द्वारा प्रोजेक्ट के नाम पर एक जमीन दिखाई गयी जहां पर गौरव सती की बहन मेघना सती और पिता कैलाश चन्द्र सती मौजूद थे । और साथ ही बताया गया कि उक्त जमीन गौरव सती मेघना सती कैलाश चन्द्र सती के नाम पर है और गौरव सती के कोर्डिनेटर तारा दत्त के द्वारा उन्हे नकली दाखिल खारिज के कागजात दिखाये गए जिसमें फर्जी तरीके से किसानों के नामों की जगह गौरव सती एवं अन्य के नाम अंकित किए गए है । और जब कुलदीप कत्याल के द्वारा स्वयं जांच की गयी तो दस्तावेज़ फर्जी पाये गए । जिसके बाद उन्होने डीएम नैनीताल को शिकायत की । और डीएम नैनीताल धीराज़ सिंह गर्ब्याल ने तत्काल संग्यान लेते हुए जांच के आदेश कर दिये ।

इस पर गौरव सती ने बताया कि कुलदीप कत्याल के द्वारा कि गयी शिकायत झूठी है क्योंकि कुलदीप कत्याल को रचिता ने कोई भी जमीन नहीं दिखाई और न ही गौरव सती उनकी बहन मेघना सती और पिता कैलाश सती मौके पर मौजूद थे । इसलिए कुलदीप कत्याल के द्वारा की गयी शिकायत झूठी है । सच बात तो ये है कि कोई भी नकली दस्तावेज़ कुलदीप कत्याल को नहीं दिये गए । बल्कि कोर्डिनेटर तारा दत्त और कुलदीप कत्याल के बीच उक्त भूमि को सीलिंग से हटाने के लिए संबन्धित दस्तावेजों का आदान प्रदान होता रहा है ।

और आगे गौरव सती ने बताया कि कुलदीप कत्याल ने डीएम का नाम लेकर उनसे लाखों रुपए की ठगी की गयी और जब कुलदीप कत्याल के द्वारा की गयी अतिरिक्त एक करोड़ की डिमांड को पूरा नहीं किया गया तो कुलदीप कत्याल के द्वारा झूठी शिकायत डीएम कार्यालय की गयी चूंकि कुलदीप कत्याल के अनुसार डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल उसके अच्छे मित्र है इसलिए गौरव सती और उनके सहयोगियों के खिलाफ झूठी शिकायत कर उन्हे फँसाने की कोशिश की जा रही है । जब इस मामले में मीडिया ने कुलदीप कत्याल का पक्ष जानने को उन्हे फोन से संपर्क किया तो उन्होने बताया कि गौरव सती के द्वारा जो प्लॉट उन्हे बेचे गए है वो गौरव साथी के नहीं है गौरव सती से उन्हे लाखों रुपए लेने है और जब उनसे पूछा गया कि डीएम धीराज गर्ब्याल को कैसे जानते है तो उन्होने जान पहचान से सीधे इंकार कर दिया और कहा वो तो प्लॉट खरीदने की अनुमति लेने गए थे । गौरव सती के द्वारा दी गयी रिकार्डिंग को भी उन्होने झूठा बता दिया जिसके बाद पत्रकार ने उनसे कहा कि कृषि भूमि जो कि गाँव की भूमि आई वह 250 वर्गमीटर से ज्यादा बाहरी व्यक्ति नहीं खरीद सकता इस पर कुलदीप कत्याल ने कहा कि सरकारी आदेश है हो जाता है जब उनसे सरकारी आदेश मांगा गया तो उन्होने फोन काट दिया। जिसके बाद मीडिया ने नैनीताल के तत्कालीन डीएम से इस मामले में उनका पक्ष जानना चाहा तो उनहने फोन नहीं उठाया जिसके बातउनके वर्तमान हरिद्वार कार्यालय में फोन किया गया और उनके पीए को सूचना दी गयी लेकिन फिर भी बात नहीं हो सकी नैनीताल संवाददाता के एडीएम से इस मामले में बात की गयी तो उन्होने स्पष्ट रूप से कहा कि वो किसी भी कुलदीप कत्याल नाम के युवक को नहीं जानते है और न हो कभी उनकी मुलाक़ात हुई है साथ ही उन्होने मीडिया को बताया कि सुरजीत सिंह की जमीन में सीलिंग मामले पर पर 23 तारीख में सुनवाई है उसके बाद ही वो कुछ बता पाएंगे ।

हमारी तफतीश में पता लगा है कि कुलदीप कत्याल नाम का शक्स लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में है ऐसे में जब वह उत्तराखंड में 250 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन का सौदा करता है और डीएम से अनुमति की बात करता है तो शांशय पैसा होता है क्योंकि उत्तराखंड में जैसे नगर पालिका प्राधिकरण नगर निगम में आने वाली जमीन के अलावा बाहरी व्यक्ति 250 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन नहीं खरीद सकता है इसका स्पष्ट सरकारी आदेश है तो डीएम की अनुमति कैसे हो सकती है और कई वर्षों का रियल एस्टेट का अनुभव रखने वाला व्यक्ति ऐसी जमीन कैसे खरीद सकता है जो सीलिंग से प्रभावित हो ?
कुलदीप कत्याल और नैनीताल के तत्कालीन डीएम का आपसी क्या संबंध है ये कहना मुश्किल है लेकिन डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल की फेसबुक प्रोफ़ाइल देखी जाये तो पता लगता है कि वो कुलदीप को अच्छी तरह से जानते है कुलदीप कत्याल की काफी तसवीरों पर व्यक्तिगत तौर पर डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने पसंद भी किया है । इस पूरे मामले में कई लोग कैमरे के सामने आकार डीएम और कुलदीप कत्याल के लिए बोल चुके है इससे साफ जाहिर है कहीं न कहीं कुछ तो चल रहा है जिसकी जांच होनी आवश्यक है। संभावना है कि डीएम से औपचारिक रूप से कुलदीप के संबंध रहे हो लेकिन गवाहों और वॉइस रिकार्डिंग के अनुसार कुलदीप कत्याल ने डीएम के नाम को लेकर लाखों की लूट की है जो क्रम बद्ध तरीके से प्रमाणित भी हो रहा है ।

इस मामले से पहले भी कई प्रकरण हो चुके है जिसमें कुलदीप कत्याल के द्वारा कार्यवाही को काही गयी एक एक बात सच साबित हुई है जिससे प्रतीत होता है इस व्यक्ति का उत्तराखंड में रसूख चलता है जिसके आदेश पर नैनीताल के अधिकारी काम करते है । कुछ महीनों पहले आवाज़ 24X7 की टीम कालाढुंगी के पास एक गाँव कनकपुर पहुंची थी जहां लैंडसाइंस बिल्डवेल कंपनी ने कार्बेट मैपल फार्म नामक अवैध प्रोजेक्ट लगाया था इस अवैध प्रोजेक्ट में लगभग 8 एकड़ जमीन का सौदा किया गया था जिस पर फेंसिंग की गयी थी जमीन के मालिक ने बताया कि यह कंपनी के द्वारा कृषि कार्य करने के लिए खरीदी गयी है अभी केवल बयाना ही मिला है लेकिन तफतीश में पता चला कि दिल्ली नोएडा में यह जमीन छोटे छोटे टुकड़े कर बेची जा रही है जब इस अवैध कॉलोनी की जानकार इस मामले में जब कालाढुंगी एसडीएम रेखा कोहली से बात की गयी तो उन्होने बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट की उन्हे कोई जानकारी नहीं है एसडीएम रेखा कोहली ने कहा कि अगर ऐसा कोई अवैध प्रोजेक्ट कृषि भूमि पर विकसित किया जा रहा है या प्रोजेक्ट के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है तो जांच करने के बाद दोषियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी ।

लेकिन छह महीने बाद उस जमीन पर कई बाहरी व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री हो जाती है जो बतौर रिकार्ड में मौजूद है तो सवाल यहाँ पर फिर खड़ा होता है कि अवैध प्रोजेक्ट को सीज़ करने की बजाय उसके रजिस्ट्री कैसे हो जाती है इसका सीधा सा मतलब है या तो अधिकारी के मामला संग्यान में नहीं है या फिर संग्यान में होते हुए उस पर कार्यवाही नहीं की गयी है और कार्यवाही न करने का कारण स्पष्ट है कि स्थानी प्रशासन पर उच्च अधिकारियों का दबाव काम कर रहा है । चूंकि मामला एसडीएम रेखा कोहली के कार्यक्षेत्र का है जिनके क्षेत्र में होने के बावजूद अवैध कालोनी विकसित हो रही है और कार्यवाही के नाम पर केवल गौरव सती को टार्गेट किया जा रहा है हम यह नहीं कह रहे कि गौरव सती और उनके सहयोगी सही है या इनके प्रोजेक्ट वैध है लेकिन कार्यवाही अगर हो तो सभी पर होनी चाहिए केवल कुलदीप कत्याल के द्वारा चिन्हित किए गए लोगों पर अगर कार्यवाही हो रही है तो इससे साफ पता चलता है है कि कुलदीप कत्याल के द्वारा लजीज मिठाई अधिकारियों को खिलाई जा रही है । जिस वजह से अधिकारी चुनिन्दा व्यवसायियों पर कार्यवाही कर रहे है ।
देखा जाये तो रामनगर और आस पास के क्षेत्र में बाहरी बिल्डर सक्रिय हो चुके है जो उत्तराखंड की बेश कीमती कृषि भूमि को छोटे छोटे प्लॉट में बदलकर बाहरी व्यक्तियों को बेच दे रहे है वो समय दूर नहीं जब उत्तराखंड में भी लैंड जेहाद जैसे शब्दों का अर्थ समझ आने लगेगा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी

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