Thursday, February 22, 2024
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उत्तराखंड नशा मुक्त अभियान को लेकर औषधि नियंत्रण विभाग ने दिखाए सख्त तेवर! खली कर्मचारियों की कमी

उत्तराखंड को साल 2025 तक नशा मुक्त बनाने के लिए औषधि नियंत्रण विभाग ने कमर कस ली है। लेकिन विभाग कर्मचारियों का रोना रो रहा है जिसकी कमी छापेमारी के दौरान साफ दिखाई देती है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द कर्मचारियों की तैनाती से कार्य आसान होगा।

साल 2025 तक उत्तराखंड राज्य को नशा मुक्त बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके क्रम में प्रदेश भर में नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य रूप से पुलिस प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत ना सिर्फ तमाम जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है बल्कि भारी मात्रा में नशीली दवाओं को भी पकड़ा जा रहा है। दूसरी ओर औषधि नियंत्रण विभाग कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहा है। जबकि मुख्य रूप से औषधि नियंत्रण विभाग पर मेडिकल स्टोर समेत फार्मा कंपनियों पर छापेमारी कर नशीली दवाओं और इंजेक्शनों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है।

उत्तराखंड राज्य में नशा एक गंभीर समस्या बनता जा रही है। यही वजह है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद से ही नशा मुक्ति उत्तराखंड बनाने की दिशा में संबंधित विभाग कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि पुलिस विभाग की ओर से लगातार छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है. जिसमें नकली दवाइयों की बड़ी खेप पकड़ी जा रही है और तमाम लोग गिरफ्तार भी हुए हैं। ऐसे में पुलिस विभाग की ओर से लगातार नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बाद औषधि विभाग भी सक्रिय हो गया है। औषधि नियंत्रण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सहायक औषधि नियंत्रक डॉ. सुधीर कुमार के नेतृत्व में पिछले तीन दिनों में देहरादून जिले के 34 दवाइयों की दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। हालांकि निरीक्षण के दौरान 12 मेडिकल स्टोर में खामियां पाए जाने पर खरीद और बिक्री पर रोक लगाते हुए बंद किया गया है। इसके साथ ही एक मेडिकल स्टोर को सील करने की कार्रवाई की गई है। यही नहीं इस निरीक्षण के दौरान मेडिकल स्टोरों से 58 संदिग्ध दवाइयों के सैंपल भी लिए गए हैं। जिसकी जांच के बाद मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई की जाएगी। राजधानी देहरादून के तमाम मेडिकल स्टोर से नशीली दवाओं को बेचने के मामले कई बार सामने आ चुके हैं। जिसके चलते पूर्व में पुलिस और ड्रग्स कंट्रोलर की ओर से संयुक्त छापेमारी की जा चुकी है। यही नहीं औषधि प्रशासन की ओर से मेडिकल स्टोर्स को इस बारे में पहले भी निर्देश दिए जा चुके हैं कि जीवन रक्षक दवाएं जिसका दुरुपयोग नशे में किया जाता है उन दवाओं को बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं दिया जा सकेगा. साथ ही सीमित मात्रा में ही इन दावों को मेडिकल स्टोर्स पर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उसकी पूरी लेनदेन की जानकारी रखने को कहा गया. बावजूद इस तरह के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

 

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