लखपति दीदी से राखी तक: महिलाओं के भरोसे भाजपा का चुनावी प्लान, रिश्तों की डोर से मजबूत करेगी पकड़

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देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने की पटकथा लिख रही भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को अपनी रणनीति के केंद्र में रखा है। पार्टी का विशेष फोकस राज्य की स्व-रोजगारी और आत्मनिर्भर महिलाओं पर है। 'लखपति दीदी' योजना की सफलता के दम पर भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपना जनाधार और मजबूत करने जा रही है।

विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी ने इस बार लखपति दीदी, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और आत्मनिर्भर महिला शक्ति को अपने अभियान के केंद्र में रखा है। संगठन का मानना है कि सरकार की योजनाओं से आर्थिक रूप से मजबूत हुई महिलाओं को पार्टी से जोड़कर चुनावी जीत की हैट्रिक का रास्ता आसान किया जा सकता है। प्रदेश में करीब दो लाख लखपति दीदी होने का दावा किया जा रहा है। भाजपा इन महिलाओं के लिए अलग-अलग सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में है। इन कार्यक्रमों में उन महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने ऋण लेकर अपना रोजगार या कारोबार शुरू किया और समय पर ऋण चुकाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं। पार्टी इन सफल महिलाओं को सरकार की योजनाओं के जमीनी प्रभाव के उदाहरण के तौर पर भी सामने लाएगी।प्रदेशभर में इस समय 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं। इन समूहों से पांच लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। भाजपा अब इन महिलाओं तक सीधे पहुंच बनाने की तैयारी में है। इसके लिए नगर निगम से लेकर ब्लॉक स्तर तक स्वयं सहायता समूहों के मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को सरकार की योजनाओं, उपलब्ध सुविधाओं और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी देने के साथ ही पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने की रणनीति है। इसके लिए भाजपा संगठन ने संबंधित प्रकोष्ठ को जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति में रक्षाबंधन को भी खास जगह दी गई है। प्रदेशभर में पार्टी के विधायक, मंत्री और आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार महिलाओं के बीच पहुंच बना रहे हैं। पहाड़ से लेकर मैदान तक आयोजित हो रहे रक्षाबंधन कार्यक्रमों में महिलाएं नेताओं की कलाई पर राखी बांध रही हैं। इसके बदले उन्हें उपहार भी दिए जा रहे हैं। पार्टी की कोशिश इन आयोजनों को केवल त्योहार तक सीमित रखने के बजाय महिलाओं के साथ राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव मजबूत करने की है। संगठन का मानना है कि राखी जैसे भावनात्मक पर्व के जरिए महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित कर लंबे समय तक रिश्ते कायम किए जा सकते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, पार्टी का उद्देश्य आत्मनिर्भर बनी महिलाओं को सरकार की ओर से मिल रही सुविधाओं और योजनाओं की पूरी जानकारी देना है। इसके लिए प्रदेशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दरअसल, आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा महिला वर्ग को अपने अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाने की तैयारी में है। लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हुई महिलाओं को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ना और रक्षाबंधन जैसे आयोजनों के जरिए व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि महिलाओं के बीच यह ‘रिश्तों की डोर’ चुनावी मैदान में भाजपा के लिए कितनी मजबूत साबित होती है।