Thursday, February 22, 2024
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अग्निवीर अमृतपाल सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिए जाने पर युवाओं में रोष! सेना जैसा सम्मान की मांग

सेना जैसे गंभीर मामले में सरकार की उदासीनता देश को खतरे में डाल सकती है। सरकार को अग्निवीर के प्रति गंभीर हाेना चाहिए। यह बात किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हरमिंदर सिंह लाडी ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कही। लाडी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर उपमंडल के मनकोट इलाके में एलओसी के पास ड्यूटी के दौरान पंजाब निवासी अग्निवीर अमृतपाल सिंह (19) की गोली लगने से मौत हो गई थी। उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए। इसके अलावा आर्मी की कोई यूनिट तक नहीं थी। कहा कि पंजाब के मानसा जिले के गांव कोटली कलां के महज 19 साल के अग्निवीर अमृतपाल सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। ट्रेनिंग के बाद करीब डेढ़ माह पहले ही छुट्टी बिताकर वह ड्यूटी पर जम्मू-कश्मीर गए थे।

मध्यम वर्गीय किसान परिवार के पुत्र सेना में भर्ती होने से पहले अपने पिता के साथ खेती में उनका हाथ बंटाते थे। 10 दिसंबर 2022 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और 11 अक्टूबर को गोली लगने से शहीद हो गए। जवान को दो फौजी भाई प्राइवेट एंबुलेंस से छोड़कर चले गए। इस बारे में जब ग्रामीणों ने पूछा तो बताया गया कि केंद्र सरकार की नई नीति के तहत अग्निवीर को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है, इसलिए सलामी नहीं दी जाएगी। यह घटना साबित करती है कि अग्निवीर इसलिए बनाए हैं, ताकि शहीद का दर्जा न दिया जाए और फौज खत्म हो जाए, जबकि पूरे उत्तराखंड का जवान फौज पर ही निर्भर है। आज भी 50 प्रतिशत से अधिक घरों के जवान सेना से ताल्लुक रखते हैं। पूर्व में तो यहां तक कहा जाता था कि पहाड़ सेना की पेंशन मनीआर्डर व्यवस्था पर जीता है। ऐसे में या तो सरकार यह योजना बंद करे अन्यथा अग्निवीर को भी सेना की सभी सुविधाएं दी जाएं। दिहाड़ी-मजदूर बना सरकार जवानों का अपमान कर रही है। सेना जैसा सम्मान नहीं मिलने पर अग्निवीर योजना के तहत सेना में गए सभी जवानों का मनोबल गिरेगा। इस मौके पर किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नवदीप सिंह कंग, हरजिंदर सिंह, हरमीत सिंह आदि मौजूद थे।

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