लोकतंत्र में हिंसा और अभद्रता की कोई जगह नहीं”:एसएसपी दफ़्तर हंगामे पर बरसे सीएम धामी

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देहरादून। हल्द्वानी में नैनीताल के एसएसपी कार्यालय के भीतर कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए हंगामे ने उत्तराखंड की सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को ले जा रही बसों को कथित तौर पर रोके जाने के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई। घटना के वीडियो सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेताओं के व्यवहार को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताया है। मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान हल्द्वानी की घटना को लेकर कहा कि लोकतंत्र में हिंसा और अभद्र व्यवहार के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए हिंसा, गाली-गलौज या सरकारी कार्यालय में हंगामे का रास्ता स्वीकार्य नहीं हो सकता।

सीएम धामी ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि जनता पहले ही कांग्रेस को नकार चुकी है। उनके मुताबिक पार्टी के लिए अब लोगों को जुटाना मुश्किल हो रहा है और इसी हताशा का परिणाम हल्द्वानी में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेता के कार्यक्रम के लिए भी पर्याप्त संख्या में लोगों को नहीं जुटा पा रही है और इसी नाराजगी में कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्यालय में जाकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह हंगामा हुआ और गाली-गलौज से जुड़े वीडियो सामने आए हैं, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा या अभद्रता नहीं की जा सकती। दरअसल, हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को लेकर आने वाली बसों को पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई थी। कांग्रेस का आरोप था कि प्रशासन ने जानबूझकर पार्टी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोकने का प्रयास किया। इसी मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी के कार्यालय पहुंचे। वहां पुलिस अधिकारियों के साथ नेताओं की तीखी बहस हुई। बाद में घटना से जुड़े वीडियो सामने आए, जिनमें कथित तौर पर तीखी नोकझोंक और अभद्र भाषा के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार के इशारे पर कांग्रेस के कार्यक्रम को असफल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका गया और पुलिस अधिकारियों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार किया। गोदियाल के मुताबिक इसी आक्रोश के चलते कांग्रेस नेता एसएसपी कार्यालय पहुंचे और वहां धरना दिया। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी राजनीतिक दल के पदाधिकारी की तरह काम करेंगे तो ऐसे अधिकारियों को चिह्नित किया जाएगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में पहुंचने से रोकने से जोड़ते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए। हल्द्वानी का यह विवाद अब महज पुलिस-कांग्रेस टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री धामी के बयान के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन का मुद्दा बना दिया है, जबकि कांग्रेस पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत में और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, हल्द्वानी के एसएसपी कार्यालय में हुए हंगामे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सीमा कहां तक होनी चाहिए।