उत्तराखंड हलचल: चीन सीमा पर बर्फबारी में फंसी सड़क सर्वे टीम, रेस्क्यू में जुटे आईटीबीपी के जवान,उधर बेरीनाग तलवार हमले में आरोपी को 7 साल की जेल

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देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से दो बड़ी और महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां भारत-चीन सीमा के करीब भारी बर्फबारी के कारण फंसी चार सदस्यीय सर्वे टीम को बचाने के लिए आईटीबीपी के जवान जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए रास्ता बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायालय ने तलवार से जानलेवा हमला करने के एक संगीन मामले में त्वरित न्याय सुनाते हुए आरोपी को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी सीमांत क्षेत्र से एक ओर जहां खराब मौसम और भारी बर्फबारी ने चार सदस्यीय भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं दूसरी ओर पिथौरागढ़ की अदालत ने तलवार से जानलेवा हमले के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीमा क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान दोनों तरफ से बर्फ काटकर रास्ता बनाने में जुटे हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र ओल्ड ढुंग में सड़क सर्वे के लिए गई भारतीय टीम 25 सितंबर से फंसी हुई है। टीम में वन विभाग के एक कर्मचारी, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के एक कर्मचारी और दो पोर्टर समेत कुल चार लोग बताए जा रहे हैं। यह टीम तहसील मुख्यालय से करीब 74 किलोमीटर दूर ढुंग से टोपीढुंगा मार्ग के निरीक्षण के लिए गई थी। बताया गया कि 25 सितंबर को अचानक मौसम खराब होने और भारी बर्फबारी के कारण रास्ता बंद हो गया। इसके चलते टीम वापस नहीं लौट सकी और ओल्ड ढुंग क्षेत्र में ही रुक गई। सीमांत क्षेत्र में लगातार बर्फबारी के कारण बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित मुनस्यारी तक लाने के लिए आईटीबीपी ने रेस्क्यू प्रयास तेज कर दिए हैं। मिलम पोस्ट के जवान ढुंग और मिलम, दोनों छोर से भारी बर्फ हटाकर रास्ता खोलने में जुटे हैं। उद्देश्य बर्फ से बंद मार्ग को जल्द से जल्द आवाजाही के योग्य बनाना है, ताकि टीम को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।  वनक्षेत्राधिकारी लवराज सिंह पांगती के अनुसार, ओल्ड ढुंग में मौजूद लोगों के लिए सेना के जवानों ने रहने, भोजन और पानी की व्यवस्था की है। इससे फंसे लोगों को तत्काल आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम और बर्फबारी के बीच उन्हें सुरक्षित वापस लाना अभी भी चुनौती बना हुआ है। सीमांत क्षेत्र में सड़क संपर्क बहाल करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है। आईटीबीपी के जवान दोनों तरफ से रास्ता खोलने में जुटे हैं और बर्फ हटने के बाद ही टीम को मुनस्यारी लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इधर पिथौरागढ़ में सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने खुटानी पावर कंपनी के सीनियर सर्वेयर पर तलवार से जानलेवा हमला करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। अदालत ने नाघर बेरीनाग निवासी जगदीश सिंह मेहता को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामला 5 मार्च 2025 का है। खुटानी पावर कंपनी के सीनियर सर्वेयर राजकुमार सिठ अपने साथियों के साथ सतेश्वर झूला पुल के पास मसाण मंदिर के समीप से गुजर रहे थे। आरोप के अनुसार, इसी दौरान जगदीश सिंह मेहता ने उनका रास्ता रोककर गाली-गलौज शुरू की। राजकुमार सिठ के पीछे मुड़ने पर मेहता ने तलवार से वार कर दिया, जिससे वह घायल हो गए। घटना के बाद बेरीनाग थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और सहायक शासकीय अधिवक्ता महेंद्र आर्य ने पैरवी की। अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 109, 126, 351(3) तथा आयुध अधिनियम की धारा 4/25 के तहत दोषी पाया और सजा सुनाई। एक ही जिले से सामने आए दोनों घटनाक्रमों में एक तरफ सीमांत क्षेत्र में प्रकृति की चुनौती से जूझ रही चार सदस्यीय टीम को सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है, तो दूसरी तरफ न्यायालय के फैसले ने जानलेवा हमले के मामले में कानूनी कार्रवाई का परिणाम सामने रखा है।