Mar 12, 2026

धारचूला की महिला का प्रमाण पत्र रद्द होगा? जांच के बाद सरकार लेगी बड़ा और कड़ा फैसला

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में एक महिला को कथित तौर पर गलत तरीके से जनजातीय प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सदन में उठाया गया। कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सदन में चर्चा के दौरान विधायक हरीश धामी ने कहा कि जनजातीय समाज के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बने प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धारचूला क्षेत्र में एक गैर-जनजातीय महिला को जनजातीय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जो गंभीर मामला है। धामी ने बताया कि इस संबंध में 29 अगस्त 2025 को रजिस्ट्री के माध्यम से जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के सचिव को शिकायत भेजी गई थी, लेकिन लंबे समय बीतने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से वास्तविक जनजातीय समुदाय के अधिकार प्रभावित होते हैं, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि धारचूला में जारी किए गए जनजातीय प्रमाण पत्र की पूरी जांच कराई जाएगी और एक महीने के भीतर इस मामले में निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सदन में उठे इस मामले के बाद जनजातीय प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पहाड़ी सीमांत क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचे, इसके लिए प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता और कड़ाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।