Apr 10, 2026

मौसम की चेतावनी अब मोबाइल पर: चारधाम यात्रियों को अलर्ट रखने के लिए सरकार का डिजिटल मास्टरस्ट्रोक

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देहरादून। विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। आगामी यात्रा सीजन की शुरुआत से पहले शुक्रवार को शासन-प्रशासन की जमीनी हकीकत परखने के लिए राज्यभर में एक व्यापक 'मगा मॉक ड्रिल' का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास के जरिए सरकार ने साफ संदेश दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

गढ़वाल मंडल के सातों जिलों में एक साथ आयोजित इस मॉक ड्रिल के दौरान करीब 50 चिन्हित स्थानों पर आपदा के काल्पनिक परिदृश्य तैयार किए गए। कहीं पहाड़ों से भूस्खलन, कहीं बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ (Flash Floods), तो कहीं भीषण सड़क हादसों के 'सीन' बनाकर रेस्क्यू टीमों की फुर्ती जांची गई। इस अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF, सेना, वायु सेना, स्वास्थ्य विभाग और फायर सर्विस की टीमों ने पूरे समन्वय के साथ हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि स्थानीय नागरिकों को भी इस ड्रिल में शामिल किया गया, ताकि समुदाय स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाई जा सके। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने वर्चुअल माध्यम से कंट्रोल रूम और फील्ड टीमों की गतिविधियों की खुद मॉनिटरिंग की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद उत्तराखंड ने कड़े सबक सीखे हैं। मंत्री ने कहा, "हमारी व्यवस्थाएं अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हम 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहे हैं। किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। देहरादून में विशेषज्ञों की टीम ने सहस्त्रधारा हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस और एयर ट्रैफिक सिस्टम की समीक्षा की, क्योंकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में हवाई रेस्क्यू ही जीवनदायिनी साबित होता है। वहीं, रिस्पना नदी में बाढ़ की स्थिति और कोरोनेशन अस्पताल में आपातकालीन मेडिकल सुविधाओं का परीक्षण किया गया। अस्पताल में ऑक्सीजन, ट्रायेज सिस्टम और रेफरल मैनेजमेंट की बारीकी से जांच की गई ताकि अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर व्यवस्थाएं न चरमराएं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह मॉक ड्रिल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि तैयारी का 'एसिड टेस्ट' है। उन्होंने कहा कि संचार और समन्वय में जो भी छोटी-मोटी कमियां मिली हैं, उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले दुरुस्त कर लिया जाएगा। इस बार सरकार का विशेष फोकस टेक्नोलॉजी पर है। मौसम की 'रियल टाइम मॉनिटरिंग' के लिए सिस्टम को और आधुनिक बनाया गया है, ताकि खराब मौसम की सटीक सूचना तत्काल यात्रियों और क्षेत्रीय कंट्रोल रूम तक पहुंच सके। यात्रा मार्गों पर संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त मशीनरी और रेस्क्यू स्टाफ की तैनाती की जा रही है। 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन और डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए इस बार चारधाम यात्रा को 'हाई-टेक सुरक्षा कवच' देने की तैयारी है।