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जेल में मनेगी साहू की दीवाली: कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल झांसी से गिरफ्तार, खुला 50 मुकदमों का काला चिट्ठी

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला देने वाले एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आखिरकार कानून का शिकंजा कस ही गया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति और इस पूरे प्रकरण के मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू को विशेष जांच दल (SIT) ने उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ ही उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को भी दबोच लिया गया है। कभी राजनीतिक और व्यावसायिक गलियारों में रसूख का दम भरने वाले साहू की इस बार की दीपावली सलाखों के पीछे यानी जेल में ही कटेगी। 

इस प्रकरण की सुगबुगाहट तब तेज हुई थी जब गत 15 अक्टूबर को खुद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में यह सनसनीखेज आरोप लगाया गया था कि गिरधारी लाल ने अपनी पहली शादी की बात छिपाकर उनसे विवाह किया था और उसके बाद से लगातार उनका मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न कर रहा था। बात यहीं नहीं थमी; आरोप यह भी था कि आरोपी ने कूटरचित दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के जरिए मंत्री को चार प्रमुख कंपनियों के निदेशक पद से अवैध रूप से हटा दिया था। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में एक नौ सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान जब पुलिस ने आरोपी की कुंडली खंगाली, तो जो तथ्य सामने आए वे हैरान करने वाले थे। गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, गैंगस्टर और धोखाधड़ी जैसे लगभग 50 गंभीर मुकदमे दर्ज मिले। पुलिस से बचने के लिए आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था और उसके नेपाल भागने तक की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसके लिए सुरक्षा एजेंसियों ने सीमाओं पर भी नजर कड़ी कर दी थी। आखिरकार, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से एसआईटी ने झांसी से उसे धर दबोचा। कानून के हाथ चाहे कितने भी लंबे क्यों न हों, रसूख की दीवारें न्याय की प्रक्रिया को ज्यादा समय तक नहीं रोक सकतीं। एक कैबिनेट मंत्री द्वारा अपने ही घर के भीतर हुए अन्याय के खिलाफ कानूनी दरवाजा खटखटाना और पुलिस द्वारा बिना किसी दबाव के अपराधियों की सीमाएं लांघकर गिरफ्तारी करना, यह संदेश देता है कि कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है। अब जबकि मुख्य आरोपी एसआईटी की गिरफ्त में है, पूछताछ के दौरान कंपनियों के फर्जीवाड़े और अन्य छिपे हुए रहस्यों से पर्दा उठना बाकी है। यह गिरफ्तारी देवभूमि की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी का एक मजबूत उदाहरण बन गई है, जहां अपराध का अंत आखिरकार सलाखों के पीछे ही होता है।