हरिद्वार कुंभ व्यस्तता का हवाला देकर समय पूर्व चुनाव कराने की राजनैतिक अटकलें पूरी तरह समाप्त

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देहरादून। उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से समय से पहले विधानसभा चुनाव होने को लेकर चल रही जोरदार चर्चाओं पर आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद विराम लगा दिया है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सियासी हलकों में यह खबर बड़ी तेजी से तैर रही थी कि राज्य में साल 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव वक्त से पहले, यानी इसी साल 2026 के नवंबर या दिसंबर महीने में ही कराए जा सकते हैं। इन दावों में कितना दम है, इस पर आज मुख्यमंत्री ने सरकार की स्थिति पूरी तरह साफ कर दी।

गुरुवार, 2 जुलाई को देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधा सवाल किया कि क्या उत्तराखंड में वाकई समय से पहले चुनाव होने जा रहे हैं? इस पर सीएम धामी ने बेहद सहजता से मुस्कुराते हुए इन सभी चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल शासन या संगठन के स्तर पर ऐसी कोई बात नहीं है। सीएम धामी ने कहा हमें किसी भी स्तर पर यह नहीं कहा गया है कि चुनाव समय से पहले हो रहा है। न ही हमारे यहाँ इस तरह की कोई तैयारियां चल रही हैं। मुझे ऐसी कोई सूचना नहीं आई है कि समय से पहले कहीं चुनाव होने जा रहे हों। वैसे चुनाव कराना चुनाव आयोग का काम है, वह जो कहेगा वो सबको मानना पड़ेगा, लेकिन अभी औपचारिक या आधिकारिक रूप से हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है। मुख्यमंत्री के इस दो टूक जवाब के बाद अब यह साफ हो गया है कि फिलहाल उत्तराखंड में तय समय (वर्ष 2027) से पहले विधानसभा चुनाव होने की कोई संभावना नहीं है और सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक हलकों में चल रही खबरें पूरी तरह से निराधार हैं। सवाल यह उठता है कि जब चुनाव में अभी समय है, तो समय से पहले चुनाव की चर्चाएं क्यों शुरू हुईं? दरअसल, उत्तराखंड में वर्तमान पांचवीं विधानसभा का कार्यकाल 23 मार्च 2027 को पूरा होने जा रहा है। तय समय सारणी (टाइमलाइन) के हिसाब से अगले साल 2027 के शुरुआत में यानी फरवरी महीने में चुनाव होने हैं, जिसके लिए अब लगभग 6-7 महीने का वक्त बचा है। लेकिन, हाल के दिनों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के कई केंद्रीय व कद्दावर नेताओं ने अचानक उत्तराखंड के ताबड़तोड़ दौरे शुरू कर दिए हैं। नेताओं की इस बढ़ी सक्रियता को समय से पहले चुनाव की आहट से जोड़कर देखा जाने लगा। इसके अलावा, राज्य में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया का तेजी से चलना, जनवरी 2027 में प्रस्तावित भव्य हरिद्वार कुंभ और उसके तुरंत बाद होने वाली देशव्यापी जनगणना को भी इसके पीछे की बड़ी वजह माना जा रहा था। राजनैतिक विश्लेषकों का अनुमान था कि कुंभ और जनगणना की व्यस्तताओं से बचने के लिए चुनावी टाइमलाइन को थोड़ा पहले (नवंबर-दिसंबर 2026) खिसकाया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस आधिकारिक बयान के बाद जहां एक तरफ अफवाहों पर ताला लग गया है, वहीं दूसरी तरफ राजनैतिक दलों ने अब राहत की सांस ली है। हालांकि, भले ही चुनाव समय पर हों, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उत्तराखंड में चुनावी मोड अभी से एक्टिव हो चुका है।