प्रकृति के संतुलन हेतु 'एक पेड़ माँ के नाम' लगाएं, प्रधानमंत्री मोदी का पर्यावरण संरक्षण आह्वान

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बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए चारधाम यात्रा को 'सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव' बताया है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की यात्रा को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सशक्त करने वाला बताते हुए श्रद्धालुओं के लिए पाँच विशेष संकल्प और एक अनूठी 'डिजिटल उपवास' की अपील जारी की है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि कुछ वर्ष पूर्व बाबा केदार के द्वार पर उन्होंने जो कहा था, वह आज सच हो रहा है "यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा।" उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। विकास के महायज्ञ ने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम और दिव्य बनाया है।

पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं से एक अनूठी अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान 'डिजिटल उपवास' रखें। यानी मोबाइल और गैजेट्स से दूरी बनाकर उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से जीने का प्रयास करें, जिससे उन्हें एक अलग और गहरी आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होगी। धाम और नदियों को साफ रखें। सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त यात्रा कर पावन धरा की गरिमा बनाए रखें। हिमालय के संतुलन को समझें और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। यात्रा के दौरान प्रतिदिन किसी न किसी रूप में दूसरों की सेवा करें। सहयात्रियों की सहायता कर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' को सशक्त करें। अपनी यात्रा के कुल खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों को खरीदने पर खर्च करें। भले ही उस वस्तु की तत्काल जरूरत न हो, लेकिन भविष्य के लिए उसे खरीदें। यातायात नियमों और यात्रा निर्देशों का पूर्ण पालन करें। एक जिम्मेदार नागरिक बनकर प्रबंधन में लगे लोगों को असुविधा न पहुँचाएं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इंफ्लूएंसर्स से भी अपील की है कि वे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों, लोक परंपराओं और यहाँ की छोटी-छोटी संस्कृतियों को अपने कंटेंट के माध्यम से पूरी दुनिया तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जैसे ऋषियों ने इन यात्राओं से भारतीय संस्कृति को दिशा दी थी, जिसे अब नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना है।