govt-ads

हरिद्वार: त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संवाद एवं विकास संकल्प सेवा सेतु सम्मेलन में मुख्यमंत्री का संदेश,गांवों के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को बताया अहम

Blog
 Image

हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए हरिद्वार में आयोजित 'त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संवाद एवं विकास संकल्प सेवा सेतु सम्मेलन' का भव्य आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए राज्य के नेतृत्व ने प्रदेश भर से जुटे पंचायत प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने का नया संकल्प दोहराया।

प्रदेश के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। हरिद्वार में आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संवाद एवं विकास संकल्प सेवा सेतु सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशक्त उत्तराखंड का रास्ता सशक्त गांवों से होकर गुजरता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से ग्रामीणों के साथ मिलकर ग्राम पंचायतों को स्वच्छ, सुंदर, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी गांवों में निवास करती है। ऐसे में प्रदेश के समग्र विकास में ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। पंचायत प्रतिनिधि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं और गांवों की जरूरतों को सरकार तक पहुंचाने के साथ विकास योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सरकार की ओर से प्रदेश के 60 हजार से अधिक त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ने की बात कही गई है। प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को आधुनिक जानकारी, योजनाओं और बेहतर कार्यप्रणाली से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यकुशलता बढ़ने से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को आधुनिक जानकारी और बेहतर कार्यकुशलता से लैस करना जरूरी है, ताकि वे अपने-अपने गांवों की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की योजनाएं तैयार कर सकें। पंचायतों को मजबूत करने के लिए जनभागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। सम्मेलन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की प्राथमिकताओं और पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने प्रतिनिधियों से ग्रामीणों के साथ मिलकर काम करने और ग्राम पंचायतों को स्वच्छता, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया। पंचायतों को स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत इकाई माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, रोजगार, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों को पंचायत स्तर पर उठाया जाता है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण को स्थानीय विकास की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि गांवों के विकास में केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों से अपेक्षा की गई कि वे अपने क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर सामने लाएं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाएं। सरकार की ओर से 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ने की पहल के जरिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्राम पंचायतों में योजनाओं की समझ, कार्यों की निगरानी और विकास की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन के जरिए सरकार ने गांवों को विकास का केंद्र बनाने और पंचायतों की भूमिका को और मजबूत करने का संदेश दिया।