उत्तराखंड के पड़ोसी राज्यों और कुछ क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू की आहट को देखते हुए उत्तराखंड का पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग ने एहतियात के तौर पर कुमाऊं मंडल के काशीपुर स्थित प्रदेश के एकमात्र सरकारी शूकर (पिगरी) फार्म में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है। संक्रमण के खतरे को शून्य करने के लिए फार्म में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। कुमाऊं मंडल के काशीपुर स्थित राज्य के एकमात्र शूकर फार्म में एहतियाती कदम उठाते हुए बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विभाग का उद्देश्य शूकरों को संक्रमण से बचाना और वायरस के प्रसार को रोकना है। काशीपुर स्थित इस फार्म में वर्तमान में चार नर, 40 मादा और 56 शूकरों के बच्चे खुले वातावरण में पाले जा रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा अधिक होने की आशंका को देखते हुए विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। फार्म परिसर में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी शूकर में स्वाइन फ्लू के लक्षण संदिग्ध पाए जाते हैं, तो तुरंत उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। फिलहाल राहत की बात यह है कि कुमाऊं मंडल में अब तक स्वाइन फ्लू के किसी भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू का वायरस मुख्य रूप से शूकरों से फैलता है और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है। इसलिए समय रहते सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। पशुपालन विभाग के अपर निदेशक कुमाऊं, डॉ. रमेश नितवाल ने बताया कि हाल ही में उन्होंने काशीपुर शूकर फार्म का निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि फार्म में सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और शूकरों की नियमित निगरानी की जा रही है। जांच के लिए सैंपल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेजे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी सैंपल में संक्रमण की पुष्टि होती है, तो उसे आगे की जांच के लिए भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी लैब भेजा जाता है, ताकि सटीक रिपोर्ट मिल सके और समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। विभाग ने पशुपालकों और आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता बनाए रखना, बीमार पशुओं से दूरी रखना और किसी भी संदिग्ध स्थिति की तुरंत सूचना देना संक्रमण को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन विभाग किसी भी संभावित खतरे को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरत रहा है।

