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उत्तराखंड में स्वास्थ्य क्रांति की नई उड़ान: सेलाकुई में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का प्रस्ताव, 19 करोड़ की योजनाओं से सशक्त होगी चिकित्सा शिक्षा

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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और चिकित्सा शिक्षा के नए युग का आगाज़ हो चुका है। सेलाकुई स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा (एचएनबी) उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 19 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान महानवमी के पावन अवसर पर 4 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक रिसर्च लैब और 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और 'नक्षत्र वाटिका' का लोकार्पण कर परिसर को एक नई पहचान दी गई।

चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक और कदम उठाया है। शीशमबाड़ा स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महानवमी के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में चार करोड़ रुपये की अनुसंधान प्रयोगशाला और 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और नक्षत्र वाटिका का लोकार्पण भी किया गया। इन परियोजनाओं से विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और चिकित्सा शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की उम्मीद है। वहीं, प्रस्तावित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण से गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो सकता है। हालांकि, अस्पताल के निर्माण और संचालन की दिशा में अगला कदम केंद्र सरकार की मंजूरी तथा परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में चिकित्सा क्षेत्र की जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए कहा कि डॉक्टरों के कंधों पर मरीजों की जान बचाने के साथ उनके भरोसे की जिम्मेदारी भी होती है। चिकित्सा का पेशा केवल डिग्री हासिल करने या नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। इसमें बेहतर प्रशिक्षण, कौशल और सेवाभाव का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि भावी डॉक्टर देश के भविष्य के कर्णधार हैं। इसलिए चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उन्हें व्यावहारिक रूप से सक्षम भी बनाया जाए। चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। विश्वविद्यालय में चार करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित अनुसंधान प्रयोगशाला चिकित्सा शिक्षा और शोध गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा होगी। वहीं, 15 करोड़ रुपये का प्रशासनिक भवन संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने में सहायक होगा। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और नक्षत्र वाटिका का लोकार्पण परिसर के विकास में एक और कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता में सुधार करने और परीक्षाओं का सही ढंग से संचालन सुनिश्चित करने की भी है। गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ शैक्षणिक अनुशासन और प्रभावी प्रशिक्षण जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इसके साथ जिला अस्पतालों को उच्चीकृत कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने के लिए अस्पतालों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक सहदेव पुंडीर, विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. भानु दुग्गल और निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अब निगाहें सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार के निर्णय और शिलान्यास की गई परियोजनाओं के समयबद्ध निर्माण पर रहेंगी। इन योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी, जब विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।