बदरीनाथ में आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का महासंगम: सीएम धामी ने संतों से लिया आशीर्वाद, सांस्कृतिक महोत्सव में बढ़ाया सीमांत क्षेत्रों का मान

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चमोली। भू-वैकुंठ श्रीबदरीनाथ धाम की पावन धरा पर रविवार को आस्था, अध्यात्म और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरी विशाल के दर्शन-पूजन किए और राज्य की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने संतों के सानिध्य में आयोजित ‘श्रीबदरीनाथ कथा महोत्सव’ में शिरकत कर आशीर्वाद प्राप्त किया और इसके बाद भारतीय सेना व जिला प्रशासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को भगवान बदरीविशाल के धाम पहुंचे। उन्होंने बदरीनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीबदरीनाथ कथा महोत्सव में प्रतिभाग कर संतों का आशीर्वाद लिया। संतों ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इसके बाद बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 में भी शिरकत की। कथा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम पहुंचना अपने आप में विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव है। भगवान बदरीविशाल की कृपा के बिना यहां पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने बदरीनाथ को भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र बताते हुए कहा कि यहां आस्था, अध्यात्म और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का सानिध्य और आशीर्वाद मिलना सौभाग्य की बात है। उन्होंने गुरुदेव धर्म जीवन दास महाराज की 125वीं जयंती के अवसर को विशेष बताते हुए उनके त्याग, तपस्या और मानव सेवा को याद किया। धामी ने कहा कि उनका जीवन समाज को सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में भावी पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से भी जोड़े रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो आधुनिक ज्ञान को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। आधुनिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का समन्वय देश को मजबूत आधार दे सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में प्राचीन विरासत और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और केदारनाथ के पुनर्निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी तीर्थाटन को लगातार विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माणा को पहले देश का अंतिम गांव कहा जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘भारत का पहला गांव’ कहकर सीमांत क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों को नई पहचान दी। उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि आदि कैलाश में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तीर्थाटन और पर्यटन के साथ प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की विविध छटा देखी। भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई। कार्यक्रम में गढ़वाली लोकनृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन मोह लिया। पांडव नृत्य और छंतोली नृत्य विशेष आकर्षण रहे। महोत्सव परिसर में स्थानीय उत्पादों, जैविक सामग्री, पारंपरिक खाद्य पदार्थों और ग्रामीण स्तर पर तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का अवलोकन कर स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खाद्य सामग्री की जानकारी ली। धामी ने कहा कि संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान भी है। लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए विकास की गति को आगे बढ़ाना जरूरी है। इस अवसर पर संतों के साथ सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु मौजूद रहे।