उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल के बीच आवागमन करने वाले लोगों का डेटा अब डिजिटल रूप में रिकार्ड रहेगा। एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) ने झूलाघाट अंतरराष्ट्रीय झूलापुल पर बार्डर एंट्री मैनेजमेंट सिस्टम लगाया है। इसमें हर नागरिक की फेस आईडी तैयार की जा रही है। इससे बार-बार आवागमन करने वाले दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही आसान होगी। भारत के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की लगभग 275 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगी हुई है। दोनों देशों का सीमांकन करने वाली काली नदी पर 12 अंतरराष्ट्रीय पुल बने हैं। इनमें से झूलाघाट और धारचूला के झूला पुलों से दोनों देशों के बीच सबसे अधिक आवागमन होता है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी पर है। झूलापुलों पर एसएसबी तैनात रहती है। नेपाल से जरूरी वस्तुओं की खरीदारी के लिए वहां के लोग भारतीय बाजारों में आते हैं। इसके अलावा मजदूर और व्यापारी भी आवाजाही करते हैं। स्कूली छात्र और स्थानीय नागरिक भी रोज झूलापुलों से आवागमन करते हैं। सीमा पर प्रतिबंधित वस्तुओं के अवैध तरीके से व्यापार के अलावा मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंका रहती है। पूर्व में अवैध तरीके से व्यापार करने वाले लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। सशस्त्र सीमा बल नागरिकों की आईडी चेक करने के साथ ही सामान की भी जांच करती है। इसके बाद ही आवाजाही की अनुमति दी जाती है। नेपाल से आने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जाती है।
एसएसबी कमांडेंट आशीष कुमार ने बताया कि झूलाघाट और धारचूला में स्थित अंतरराष्ट्रीय झूला पुल पर आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक माह के ट्रायल पर बार्डर एंट्री मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसमें आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का डाटा कम्प्यूटर में फीड किया जा रहा है। इसके लिए कैमरे से फेस आईडी बनाई जा रही है। जिसके बाद वह व्यक्ति जब दोबारा आएगा तो कैमरे पर अपना फेस दिखाकर आसानी से आवाजाही कर सकेगा। इस सिस्टम के बाद यदि संबंधित व्यक्ति बार्डर से कभी भी आवागमन करता है तो उसका पूरा डाटा तुरंत निकल आएगा। इससे एसएसबी और आवागमन करने वाले नागरिकों का समय बचेगा। कमांडेंट आशीष कुमार के बताया कि इस कार्य में अभी समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि एक माह बाद व्यापारियों से इस सिस्टम के बारे में फीडबैक लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस समय पुल पर अधिक भीड़भाड़ रहेगी,तो रजिस्टर पर मैनुअली एंट्री कराई जाएगी, ताकि लोगों को लंबा इंतजार न करना पड़े। कमांडेंट आशीष कुमार ने बताया कि इस साफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा पर स्थापित सभी प्रमुख ट्रेड एवं ट्रांजिट रूटों से आवागमन करने वाले नागरिकों के प्रवेश एवं निकास से संबंधित विवरण को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रूप से दर्ज करना है। यह पहल न केवल सीमा प्रबंधन को आधुनिक बनाएगी,बल्कि भारत-नेपाल के बीच पारंपरिक व्यापार एवं आवागमन को भी अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करेगी। सीमांत पिथौरागढ़ जिले में स्थित अंतरराष्ट्रीय झूला पुलों से अभी तक भारत-नेपाल के अलावा किसी भी देश के नागरिकों को आवागमन की अनुमति नहीं है। केवल चंपावत जिले के बनबसा पुल से ही बीजा दिखाकर थर्ड कंट्री के लोग आ जा सकते हैं। BEMS शुरू होने के बाद किसी भी तीसरे देश का व्यक्ति यदि आवाजाही का प्रयास करता है तो तुरंत पकड़ा जाएगा।
BEMS प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं
सीमा से आवागमन करने वाले नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से रखना।
मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता को कम कर समय की बचत एवं कार्यकुशलता में वृद्धि।
डेटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकी मानकों का उपयोग।
सीमा प्रबंधन, निगरानी एवं विश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाना।
भविष्य में अन्य प्रमुख ट्रेड एवं ट्रांजिट रूटों पर लागू किए जाने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना।