देहरादून। उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में कोई भी बढ़ोतरी न करने का निर्णय लिया है। राज्य गठन के बाद यह केवल तीसरी बार है जब आयोग ने 'शून्य टैरिफ' आदेश जारी किया है। इससे पहले वर्ष 2006-07 और 2014-15 में भी उपभोक्ताओं पर बिजली की दरों का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया था।
राज्य गठन के बाद नियामक आयोग ने अपना पहला टैरिफ ऑर्डर वर्ष 2003 में पेश किया था। उस समय की तुलना में आज की बिजली व्यवस्था में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। 2003 में आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई फिक्स चार्ज नहीं रखा था और बिजली की दरें महज 1.80 रुपये से 2.50 रुपये प्रति यूनिट के बीच थीं। व्यावसायिक दरों को भी तीन से साढ़े तीन रुपये के बीच रखा गया था। आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 16 वर्षों में बिजली दरों में उतार-चढ़ाव का लंबा दौर रहा है। वर्ष 2009-10 वह समय था जब प्रदेश में बिजली दरों में सर्वाधिक 17 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद 2012-13 में 10 प्रतिशत और 2023-24 में 9.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। पिछले तीन वर्षों (2023 से 2025) में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद, इस साल 'जीरो परसेंट' का फैसला उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। 2003 के पहले टैरिफ आदेश के समय प्रदेश की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। उस वक्त उत्तराखंड के 2801 गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी और केवल 30 प्रतिशत घरों में ही बिजली कनेक्शन उपलब्ध थे। आयोग ने तब 2005 तक शत-प्रतिशत मीटरिंग का लक्ष्य रखा था। उस दौर में प्रदेश में कुल उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 8.65 लाख थी, जिनमें से करीब एक लाख उपभोक्ताओं के पास मीटर तक नहीं थे। आज उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं का ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। उपभोक्ताओं की संख्या 8.65 लाख से बढ़कर अब 29 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर वितरण प्रणाली के कारण अब प्रदेश के लगभग हर घर तक बिजली पहुंच चुकी है। जानकारों का मानना है कि इस बार दरों में बढ़ोतरी न होने से न केवल घरेलू बजट संतुलित रहेगा, बल्कि छोटे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
16 साल में कब कितनी बढ़ोतरी
वर्ष प्रतिशत बढ़ोतरी
2010 10 17
2012 11 10
2013 14- 05
2014 15 00
2015 16 7.30
2016 17 5.10
2017 18 5.80
2018 19 2.60
2019 20 3.50
2020 21 4.50
2021 22 4.30
2022 23 2.68
2023 24 9.64
2024 25 6.92
2025 26 5.62
2026 27 00