Apr 04, 2026

गणेश गोदियाल का मिशन 2027: क्या वे अपनों के हमलों से बचकर भाजपा के किले को भेदने में सफल हो पाएंगे?

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देहरादून। सत्ता के सूखे को खत्म करने और 2027 के विधानसभा चुनाव में वापसी करने की बड़ी उम्मीदें लेकर चल रही कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड में अपने ही अंदरूनी घमासान से जूझ रही है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भाजपा के हमलों का जवाब देने के बजाय अपने ही नेताओं की खींचतान और गुटबाजी को रोकने के लिए ढाल बनना पड़ रहा है। दो महीने से अधिक समय से प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर मंथन चल रहा है, लेकिन कांग्रेस हाईकमान अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले पाया है। नवंबर 2025 में जब कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी, तब पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिला था। थलीसैंण से पूर्व विधायक रहे गोदियाल दूसरी बार इस पद पर आसीन हुए। उनके साथ प्रीतम सिंह को प्रचार अभियान समिति और हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी दी गई। इस बदलाव को 2027 के चुनाव की तैयारी के रूप में देखा गया, लेकिन कुछ ही महीनों में पार्टी के अंदर पुराने मतभेद और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, एक तरफ हरीश रावत के समर्थक नेता सक्रिय नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ वरिष्ठ नेता पुराने विवादों को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ खुली बयानबाजी कर रहे हैं। हाल ही में हरक सिंह रावत के बयानों पर हरीश रावत समर्थक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। धारचूला विधायक हरीश धामी जैसे नेताओं ने हरीश रावत के सम्मान में सामूहिक इस्तीफे तक की अपील की बात कही। इस घमासान में गोदियाल को पार्टी की एकजुटता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ रहा है। उन्होंने सभी नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी मतभेद सार्वजनिक रूप से न व्यक्त किया जाए। उन्होंने कहा, “कोई भी बात हो तो उसे पार्टी फोरम में रखा जाए। बयानबाजी से पार्टी की छवि खराब होती है। इस समय सभी नेताओं को मतभेद भुलाकर कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में मुख्य अड़चन यह है कि वरिष्ठ नेता अपने-अपने समर्थकों को जगह दिलाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि हाईकमान जंबो कार्यकारिणी बनाने के पक्ष में नहीं है। इससे फैसला लटका हुआ है। गोदियाल ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। चुनावी मोर्चे पर कांग्रेस कमजोर दिख रही है। भाजपा सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने के बजाय पार्टी का ध्यान आंतरिक कलह पर केंद्रित हो गया है। हाल के दिनों में कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और बजट जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन किए, लेकिन अंदरूनी खींचतान ने इन प्रयासों की धार को कुंद कर दिया है। गोदियाल के नेतृत्व में कुछ भाजपा नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को थोड़ी मजबूती मिली है, लेकिन गुटबाजी इस सकारात्मक पहल को भी प्रभावित कर रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “2027 के चुनाव में जीत की संभावनाएं तभी बनेंगी जब पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरेगी। गुटबाजी हमें कमजोर कर रही है। हाईकमान को जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए।” दूसरी ओर, हरीश रावत समर्थक नेता मानते हैं कि वरिष्ठ नेता की उपेक्षा से पार्टी को नुकसान हो रहा है। गणेश गोदियाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन की मजबूती पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर भाजपा की “विफलताओं” के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि फिलहाल कांग्रेस का कमांडर चुनावी मैदान में अकेला पड़ता जा रहा है, जबकि पीछे अपना ही घर संभालने में जुटा है। 2027 के चुनाव अभी डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी घरेलू कलह सुलझा ली तो ही सत्ता की राह आसान हो सकेगी। अन्यथा, गुटबाजी का यह घमासान पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल की चुनौती अब यह है कि वे अपने ढाल बनने की भूमिका से निकलकर आक्रामक मोर्चा संभाल सकें।