देहरादून। सीमित संसाधनों और तेजी से बढ़ती विकास जरूरतों के बीच जूझ रहे उत्तराखंड के सामने राजस्व बढ़ाना हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती रहा है। बजट की कमी के कारण कई बार राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाएं भी रफ्तार नहीं पकड़ पातीं। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार ने अब पारंपरिक तरीकों से इतर 'नवाचार और हाई-टेक तकनीक' के जरिए राज्य का खजाना भरने की मेगा योजना तैयार की है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में राजस्व वृद्धि को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने विभिन्न विभागों से लक्ष्य के मुकाबले अर्जित राजस्व की जानकारी लेते हुए राजस्व बढ़ाने के नए प्रयासों और नवाचारों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए आय के नए स्रोत तलाशे जाएं। इसके लिए तकनीक, डेटा एनालिसिस और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता देने को कहा गया। राजस्व बढ़ाने की कवायद में राज्य सरकार की नजर सबसे पहले SGST पर है। मुख्य सचिव ने राज्य कर विभाग को टैक्स चोरी और कर अपवंचना रोकने के लिए एआई आधारित जांच व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। अगले चार से पांच महीनों में AI आधारित मैकेनिज्म तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था के जरिए अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों और संभावित टैक्स चोरी की पहचान की जा सकेगी। इससे विभाग को पारंपरिक जांच व्यवस्था के साथ तकनीक का इस्तेमाल कर राजस्व नुकसान रोकने में मदद मिलेगी। राजस्व बढ़ाने के लिए परिवहन विभाग में लगे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने इन कैमरों को खनन, वन और राज्य कर विभाग के डेटा से जोड़ने की बात कही। एएनपीआर कैमरों से वाहनों की आवाजाही की जानकारी मिलती है। इसे खनन और अन्य विभागों के आंकड़ों से जोड़ने पर खनन सामग्री के परिवहन, वाहनों की आवाजाही और उससे जुड़े राजस्व की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। इससे अवैध खनन और राजस्व संबंधी अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने खनन को भी राजस्व बढ़ाने के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करने की तैयारी की है। मुख्य सचिव ने वन और गैर-वन क्षेत्रों में नए खनन लॉट चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिला प्रशासन का सहयोग लेने को कहा गया है। इसके अलावा जिन खनन और प्रकाष्ठ लॉट पर वन निगम काम नहीं कर पा रहा है, वहां वन विभाग को अपने स्तर से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की कोशिश ऐसे संसाधनों को लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से रोककर उनका बेहतर आर्थिक उपयोग सुनिश्चित करने की है। उत्तराखंड की प्राकृतिक और वन संपदा को देखते हुए सरकार अब गैर-पारंपरिक राजस्व स्रोतों पर भी फोकस कर रही है। मुख्य सचिव ने राज्य में जड़ी-बूटी क्षेत्र की संभावनाओं का अध्ययन कराने के निर्देश दिए हैं। अध्ययन के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के क्षेत्र से राज्य को कितनी संभावित आय हो सकती है। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट को भी राजस्व के नए विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तराखंड के विशाल वन क्षेत्र और पर्यावरणीय संसाधनों को देखते हुए कार्बन क्रेडिट के जरिए आर्थिक लाभ हासिल करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। सरकार नए इको टूरिज्म स्थलों के विकास पर भी जोर दे रही है। प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से समृद्ध उत्तराखंड में नए पर्यटन स्थलों को विकसित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ राज्य की आय बढ़ाने की योजना है। दरअसल, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, शहरी विकास और आधारभूत ढांचे की बढ़ती जरूरतों के बीच राज्य पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार की कोशिश मौजूदा राजस्व स्रोतों को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के लिए ऐसे क्षेत्र विकसित करने की है, जो उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से स्थायी आय का आधार बन सकें।

