Mar 23, 2026

उत्तराखंड के लिए संतुलित कैबिनेट: क्षेत्रीय प्रगति को बढ़ावा देने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने बांटे विभाग

post-img

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ अब उनके ऊपर विभागों का बोझ कुछ हद तक कम हो गया है, लेकिन बड़े और महत्वपूर्ण महकमों की जिम्मेदारी अभी भी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर है। कैबिनेट विस्तार के बाद मुख्यमंत्री अब 18 विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि विस्तार से पहले उनके पास 35 विभाग थे। यह बदलाव पांच नए कैबिनेट मंत्रियों को विभाग सौंपने से आया है, जिससे धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कामकाज की गति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

धामी सरकार में फिलहाल कैबिनेट मंत्रियों की कुल संख्या 11 हो गई है। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में आठ मंत्री थे। लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की मांग और चर्चाएं चल रही थीं। इस बीच कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे से मंत्रिमंडल में पांच पद खाली हो गए थे। इन दोनों के विभाग मुख्यमंत्री के पास ही थे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सेवक की जिम्मेदारी के साथ-साथ 35 विभागों का कुशल संचालन किया, लेकिन प्रदेश के मुखिया होने के नाते उनकी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी थीं, जिससे विभागों की नियमित निगरानी के लिए समय सीमित रहता था। कैबिनेट विस्तार के बाद कई विभाग नए मंत्रियों को सौंपे गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा, गृह, वित्त, ऊर्जा, राजस्व, वन, सिंचाई जैसे बड़े और संवेदनशील विभाग मुख्यमंत्री के पास ही बने हुए हैं। पांच नए कैबिनेट मंत्रियों को सौंपे गए विभागों से चुनावी वर्ष में विभिन्न वर्गों के लिए योजनाओं में तेजी आने की संभावना है। खजानदास को समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मिला है, जिसके माध्यम से दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की योजनाओं को गति देने की जिम्मेदारी होगी। पहली बार मंत्री बने भरत सिंह चौधरी को ग्राम्य विकास एवं एमएसएमई विभाग सौंपा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे उद्योगों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास विभाग मिला है, जबकि प्रदीप बत्रा अब परिवहन विभाग देखेंगे। ये सभी विभाग जनता से सीधे जुड़े हुए हैं और इनमें बेहतर प्रदर्शन से सरकार की छवि मजबूत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार से न केवल मुख्यमंत्री का कार्यभार संतुलित हुआ है, बल्कि नए मंत्रियों पर भी विभागों में तेजी लाने, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने और जनता तक पहुंच बढ़ाने की चुनौती है। धामी सरकार अब चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है, ऐसे में नए मंत्रियों का प्रदर्शन आने वाले महीनों में राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि विभागों का बंटवारा विकास को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से किया गया है।