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रुद्रप्रयाग को मिली बड़ी सौगात: 156 करोड़ की लागत से बने बायपास पुल व टनल का सीएम धामी ने किया निरीक्षण

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा को और अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सोमवार को रुद्रप्रयाग पहुंचे मुख्यमंत्री ने चारधाम महापरियोजना के तहत लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अत्याधुनिक पुल और सुरंग (टनल) मार्ग का औचक निरीक्षण किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर फिलहाल ट्रायल के तौर पर आवागमन शुरू कर दिया गया है, जिसे जल्द ही जनता को समर्पित करते हुए इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। इस सौगात से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वर्षों से चली आ रही जाम की विकट समस्या से भी हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में रुद्रप्रयाग में एक महत्वपूर्ण परियोजना तैयार हो गई है। करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और सुरंग मार्ग पर ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को परियोजना का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों और यातायात व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। मार्ग पर नियमित यातायात शुरू होने से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को रुद्रप्रयाग बाजार के जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। चारधाम सड़क परियोजना के तहत तैयार इस मार्ग में अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। संपर्क मार्ग को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई करीब 1.18 किलोमीटर है। यह मार्ग केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगा। इसके शुरू होने से दोनों धामों की ओर जाने वाले वाहनों को रुद्रप्रयाग शहर के मुख्य बाजार से होकर गुजरने की आवश्यकता कम होगी। चारधाम यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग में वाहनों की आवाजाही बढ़ने से कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। इसका असर स्थानीय लोगों के साथ तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर भी पड़ता है। नए पुल और सुरंग मार्ग से यातायात को वैकल्पिक रास्ता मिलने के कारण शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यात्रियों के समय की बचत और यात्रा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बेहतर सड़क संपर्क से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारोबार तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार भी हो सकेगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्यों की जानकारी भी ली। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन के खतरे को कम करना और यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित बनाना है। मुख्यमंत्री ने संबंधित कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए चारधाम मार्गों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के तहत संचालित संगम लाइब्रेरी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पुस्तक दान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबें ज्ञान बढ़ाने और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए पुस्तकालय उपयोगी साबित हो सकते हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू हुए इस अभियान के तहत संगम लाइब्रेरी को अब तक 2500 से अधिक पुस्तकें मिल चुकी हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान, साहित्य और अन्य विषयों से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम नागरिकों ने भी अभियान में सहयोग दिया है। मुख्यमंत्री धामी ने भी पुस्तकालय के लिए 150 पुस्तकें दान कीं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के अनुसार, अभियान के तहत प्राप्त पुस्तकें विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को अध्ययन सामग्री मिल रही है। जनसहभागिता के माध्यम से पुस्तकालयों को ज्ञान और अध्ययन के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने एक ओर चारधाम यात्रा से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय जैसी शैक्षिक पहल को भी प्रोत्साहित किया। पुल और सुरंग मार्ग के नियमित संचालन से यात्रियों को कितनी राहत मिलती है, यह आगे यातायात व्यवस्था के अनुभव से स्पष्ट होगा।